शौर्य और संकल्प: शहीद टेकराम वर्मा का शहादत दिवस संपन्न
शौर्य और संकल्प: शहीद टेकराम वर्मा का शहादत दिवस संपन्न
पत्नी राजकुमारी वर्मा को मिली बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी
बिलासपुर/करेली: मातृभूमि की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले, अदम्य साहस और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती और शहीद टेकराम वर्मा (168 बटालियन, सीआरपीएफ) के शहादत दिवस के अवसर पर आदर्श मुक्तिधाम बोदरी में विशेष संकल्प संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शौर्य की गाथाओं के साथ-साथ भविष्य के सामाजिक नवनिर्माण का संकल्प लिया गया।
सैन्य सम्मान और ऐतिहासिक विरासत का संगम
शहादत दिवस कार्यक्रम का कार्यान्वयन सीआरपीएफ टीम द्वारा असिस्टेंट कमांडेंट कलावती ठाकुर के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में समुद्र शास्त्री ने विशेष रूप से महाराणा प्रताप के संघर्ष और अदम्य साहस को याद किया। उन्होंने उन वीर योद्धाओं का उल्लेख किया जिन्हें वर्तमान में ‘गाड़िया लोहार’ के नाम से जाना जाता है, जो आज भी अपने स्वाभिमान के साथ इतिहास की अटूट कड़ी बने हुए हैं।
अमर शहीद का परिचय:
नाम: शहीद टेकराम वर्मा (भर्ती 2004, वीरगति 2010)
परिवार: पिता पुनीत राम वर्मा, माता रामकली वर्मा, पत्नी राजकुमारी वर्मा और पुत्री जानवी वर्मा।
राष्ट्रीय सचिव पद की घोषणा और पुनर्वास संकल्प
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की मजबूती और विशेषकर शहीद परिवारों के उत्थान हेतु बड़ा निर्णय लिया गया। विश्व मानव परमार्थ कल्याण केंद्र (ट्रस्ट) द्वारा राजकुमारी वर्मा को संस्था का राष्ट्रीय सचिव मनोनीत करने की घोषणा की गई।
मुख्य लक्ष्य: शहीद परिवारों और निराश्रित महिलाओं की समस्याओं को केंद्र बिंदु में लाकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना और उनके हक की लड़ाई लड़ना।
राजकुमारी वर्मा को विश्व हिंदू महासभा और अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा आजीवन सदस्यता भी प्रदान की गई।
रक्षा सूत्र और भविष्य की योजना
इस भावुक क्षण में समुद्र शास्त्री ने अपनी मुंह बोली बहन राजकुमारी वर्मा को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने एक बड़े भाई के रूप में आजीवन साथ खड़े रहने और रक्षा करने का वचन दिया। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “जुनून के साथ जीना सीखें; असंभव को भी संभव करना ही वास्तविक जुनून है”।
कार्यक्रम के समापन पर अहिल्याबाई होल्कर आदर्श मुक्तिधाम के संरक्षक लक्ष्मण पाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान सनातनी संस्कृति के संरक्षण हेतु सनातनी गुरुकुलों की स्थापना की मांग दोहराई गई, जो भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत संवैधानिक ट्रस्ट द्वारा संचालित होंगे। इस आयोजन में विश्व हिंदू सेवा दल और अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना के सदस्यों ने प्रमुखता से शिरकत की।
”शौर्य, स्वाभिमान और सेवा का यह संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”

