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​बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में व्याप्त कथित विसंगतियों, नियमों की अनदेखी को देखते हुए मोर्चा खोल कर किया विरोध

बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में भेदभाव और मनमानी का आरोप, न्याय के लिए सदस्यों ने खोला मोर्चा
​बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बक्सर राजपूत क्षत्रिय समाज में व्याप्त कथित विसंगतियों, नियमों की अनदेखी और पदाधिकारियों की मनमानी के खिलाफ समाज के सदस्यों ने स्वर मुखर करना शुरू कर दिया है। बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान ग्राम झलियापुर एवं नवागढ़ क्षेत्र के निवासी संतोष सिंह क्षत्रिय ने समाज के वर्तमान पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
​प्रमुख आरोप एवं शिकायतें:
​प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संतोष सिंह क्षत्रिय ने समाज के संचालन पर निम्नलिखित गंभीर सवाल उठाए:
​पारदर्शिता का अभाव: पीड़ित सदस्य का आरोप है कि उन्हें आज तक ग्राम या क्षेत्रीय स्तर पर कोई भी औपचारिक सूचना या प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जबकि सामाजिक और धार्मिक कार्यों में उनसे निरंतर सहयोग की अपेक्षा की जाती है।
​उपेक्षा और भेदभाव: पिछले तीन वर्षों से उनके साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। सामाजिक पूजा-पाठ और कार्यक्रमों में क्षेत्रीय पदाधिकारियों द्वारा कथित रूप से भेदभाव बरतने की बात कही गई है।
​आर्थिक अनियमितता: चंदा वसूली के नियमों में बदलाव पर सवाल उठाते हुए बताया गया कि शुल्क ₹10 से बढ़ाकर ₹50 कर दिया गया है, लेकिन इस राशि के उपयोग और सामाजिक व्यवस्था के सुधार में कोई पारदर्शिता नहीं है।
​भाई-भतीजावाद: न्यायमंडल और पदाधिकारियों पर निष्पक्षता त्यागकर व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर निर्णय लेने के आरोप लगाए गए हैं।
​प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग:
​संतोष सिंह क्षत्रिय ने जानकारी दी कि इस संबंध में उन्होंने स्थानीय थाना, जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण उन्हें प्रेस का सहारा लेना पड़ा।
​अल्टीमेटम और भावी रणनीति:
​विज्ञप्ति के माध्यम से पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि:
​एक माह के भीतर ग्राम स्तर पर उनकी समस्याओं की सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
​क्षेत्रीय स्तर पर निष्पक्ष जांच कर निर्णय लिया जाए।
​समाधान न होने की स्थिति में मामले को उच्च स्तरीय समिति को भेजा जाए।
​”यदि समाज के भीतर मुझे न्याय नहीं मिला, तो मैं अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए माननीय न्यायालय की शरण लेने हेतु बाध्य होऊंगा।”
— संतोष सिंह क्षत्रिय
​प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य रूप से रामनिहोरा सिंह राजपूत, गुलाब सिंह राजपूत, बागेश्वर सिंह राजपूत, संतोष सिंह राजपूत सहित समाज के अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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