सीसीटीवी बना निर्णायक साक्ष्य: हत्या के प्रयास मामले में दो आरोपियों को 10-10 वर्ष की सजा
मुंगेली | थाना लोरमी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मसना में हुए गंभीर मारपीट एवं हत्या के प्रयास के मामले में माननीय सत्र न्यायालय मुंगेली ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (सीसीटीवी फुटेज) के मजबूत आधार पर लिया गया, जो इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा।
प्रकरण के अनुसार, अपराध क्रमांक 224/2024 में आरोपी लोकनाथ कश्यप (39 वर्ष) एवं कमल कश्यप (36 वर्ष), दोनों निवासी ग्राम मसना, के विरुद्ध प्रार्थी चंद्रकांत कश्यप की रिपोर्ट पर प्रारंभ में धारा 294, 506, 323/34 भारतीय दंड विधान के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) भी जोड़ी गई।
घटना दिनांक 14 जून 2024 की है, जब चंद्रकांत कश्यप अपने घर की छत की ढलाई के लिए मिक्सर मशीन लेकर जा रहा था। इसी दौरान आरोपी लोकनाथ कश्यप ने रास्ता रोककर विवाद किया। बाद में, जब चंद्रकांत अपने पिता दिनेश कश्यप के साथ निर्माण सामग्री लेने जा रहा था, तभी रास्ते में दोनों आरोपियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।
आरोपी कमल कश्यप ने लोहे की गैती से तथा लोकनाथ कश्यप ने डंडे से प्रार्थी एवं उसके पिता के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ वार किए। इस हमले में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के दौरान मौके पर मौजूद कुलदीप कश्यप, नरेंद्र कश्यप, साकेत कश्यप और अशोक साहू ने बीच-बचाव किया।
इस मामले की सबसे अहम कड़ी घटनास्थल के पास स्थित मेडिकल दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज रही, जिसमें पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई थी। न्यायालय ने गवाहों के बयान, दस्तावेजों एवं सीसीटीवी फुटेज के सूक्ष्म परीक्षण के बाद यह पाया कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से जान से मारने की नीयत से हमला किया था।
माननीय सत्र न्यायाधीश श्रीमती गिरिजा देवी मेरावी ने आरोपियों को धारा 307/34 भारतीय दंड विधान के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹5000-₹5000 अर्थदंड से दंडित किया।
साथ ही न्यायालय ने पीड़ितों को प्रतिकर राशि दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुंगेली को जांच कर उचित क्षतिपूर्ति प्रदान करने की अनुशंसा भी की है।
इस प्रकरण की विवेचना निरीक्षक अखिलेश कुमार वैष्णव द्वारा की गई, जबकि न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी लोक अभियोजक रजनीकांत सिंह ठाकुर ने की।
🔹 विशेष तथ्य:
इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (सीसीटीवी फुटेज) ने अभियोजन पक्ष को संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे न्यायालय को ठोस आधार पर निर्णय देने में सहायता मिली।
