बिल्हा में ‘परशुराम भवन’ के भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद; सरकारों पर कसा तंज
बिलासपुर/बिल्हा: बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक में ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में ज्योतिष पीठ के आदि गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आगमन हुआ। अवसर था—समाज के आपसी सहयोग से निर्मित होने वाले भव्य भगवान परशुराम भवन के निर्माण कार्य का अवलोकन और आशीर्वाद समारोह।

भव्य स्वागत और उत्साह का वातावरण
कार्यक्रम स्थल पर शंकराचार्य महाराज के पहुँचते ही समूचा वातावरण ‘जय परशुराम’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। समाज के सदस्यों द्वारा उनका भव्य स्वागत पुष्प वर्षा और विशेष आरती के साथ किया गया। इस गौरवशाली क्षण का साक्षी बनने के लिए किसी एक दल के नहीं, बल्कि भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के प्रबुद्ध जन व भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

जनसहयोग से आकार लेगा परशुराम भवन
ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि इस भवन की आधारशिला (नींव) लगभग 6 माह पूर्व रखी गई थी। खास बात यह है कि इस विशाल भवन का निर्माण पूर्णतः समाज के आपसी सहयोग और चंदे से किया जा रहा है। निर्माण कार्य की गति को देखते हुए आगामी 2 वर्षों के भीतर इसके पूर्ण होने की प्रबल संभावना जताई गई है।
सत्ता और व्यवस्था पर तीखे प्रहार
मीडिया से वार्तालाप के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने चिरपरिचित बेबाक अंदाज में नजर आए। उन्होंने धर्म, राष्ट्र और विशेषकर गौवंश की रक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

गौ-रक्षा पर तंज: उन्होंने वर्तमान केंद्रीय और राज्य सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल बातों से गौ-सेवा नहीं होती, धरातल पर गौवंश आज भी असुरक्षित है।
राष्ट्र विकास और धर्म: उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि विकास की चकाचौंध में धार्मिक मूल्यों और परंपराओं की अनदेखी की जा रही है।
राजनीतिक दलों को नसीहत: मंच पर विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों की उपस्थिति के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्ता का परम धर्म गौवंश और सनातन मूल्यों की रक्षा करना होना चाहिए।
इस पूरे कार्यक्रम का कवरेज हमारे प्रतिनिधि संजय मिश्रा के द्वारा किया गया देखिए विधिवत रिपोर्ट
बिल्हा में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल ब्राह्मण समाज की एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि शंकराचार्य के उद्बोधन ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था को सोचने पर विवश कर दिया।
