जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला महोत्सव के उपलक्ष में विशेष महोत्सव किया गया
_*।। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ।।*_
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस बोदरी तहसील कार्यालय द्वारा समस्त मातृशक्ति को शुभकामनायें, बधाइयाँ और अभिनन्दन सहित सादर वन्दन 🙏।
*यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।*
*यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।*
अर्थात जहाँ स्त्रियों की पूजा ( मान-सम्मान ) होती है, वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नही ( अपमान, तिरस्कार ) होती, उनका सम्मान नही होता, वहाँ किए गए समस्त अच्छे कर्म भी निष्फल हो जाते हैं।
अन्य देशों में नारी को केवल भोग-कामना के लिए ही समझा जाता है लेकिन भारत देश नारी को युग परिवर्तन का दर्जा देती है। भारत नाम है पुरुष का लेकिन कहते है सभी भारत माता। जिस देश का नाम ही स्त्री से होता है वहाँ स्त्री का सम्मान न हो यह तो दुर्भाग्य की बात है।
*वेदों व प्राचीन शास्त्रों में महिलाओं की स्थिति -*
१. वेद स्वयं कहता है *स्त्रीर्हि ब्रह्मा बभूविथ* अर्थात् स्त्री यज्ञ की ब्रह्मा हो सकती है।
२. *यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:* अर्थात् जहां नारियों की पूजा होती है वहां देवता निवास करते हैं।
*यत्र एतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्र अफला: क्रिया:* अर्थात् जहां नारियों का सम्मान नहीं होता वहां की जाने वाली सभी क्रियाएं निष्फल होती हैं।
( मनुस्मृति )
३. *अनन्यरुपा पुरुषस्य दारा ।*
( रामायण )
अर्थात् स्त्री पुरुष अर्थात् पति का ही अभिन्न रुप होती है।
૪. *स्त्रीणां भर्ता हि देवता* अर्थात् स्त्रियों का पति ही उनका देवता होता है।
( रामायण )
५. *स्त्रीणां पवित्रं परमं पतिरेको विशिष्यते* अर्थात् स्त्रियों का परम पवित्र एक पति को ही कहा गया है।
६. *भार्या श्रेष्ठतम: सखा* अर्थात् पत्नी पति की सर्वश्रेष्ठ मित्र है।
( महाभारत )
७. *माता गुरुतरा भूमे:* अर्थात् माता भूमि से भी भारी है।
( महाभारत )
८. *नास्ति मातृसमो गुरु:* अर्थात् माता के समान कोई गुरु नहीं ।
( महाभारत )
९. *गुरुणां चैव सर्वेषां माता परमेको गुरु:* अर्थात् सभी गुरुओं में माता सबसे बडा गुरु है ।
( महाभारत )
१०. *पुत्रेण दुहिता समा* अर्थात् पुत्र व पुत्री के साथ समानता का व्यवहार करना चाहिए।
( महाभारत )
११. *माता निर्माता भवति* अर्थात् माता ही सन्तान का निर्माण करने वाली होती है।
१२. *गृहिणी सचिव: सखी मिथ:* अर्थात् गृहिणी घर की मंत्री और पति की मित्र दोनों होती है ।
अंत में गोष्टी समापन जनकल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस, नवीन भारती संयोजक एवं रीना भारती, वूमेन विंग हेड ज्योति कुलदीप , मीना ,सीता, शांति ने सभी सदस्यों को सम्मानितकरते हुए जल्द ही बैठक आयोजित करआगे की स्थिति पूरी तरह से सही हो सके।
