गलवान घाटी के वीर सपूत सूबेदार मेजर विजय कौशिक की प्रेरक जीवन यात्रा

गलवान घाटी के वीर सपूत सूबेदार मेजर विजय कौशिक की प्रेरक जीवन यात्रा

बिलासपुर। भारतीय सेना के इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल इंजीनियरिंग (EME) कोर में 30 वर्षों तक उत्कृष्ट सेवा देने वाले ग्राम बरतोरी (बिल्हा) के सूबेदार मेजर विजय कौशिक की जीवन गाथा साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल है। उनका संपूर्ण सैन्य जीवन देश सेवा को समर्पित रहा और सेवानिवृत्ति के बाद भी वे समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सूबेदार मेजर विजय कौशिक ने 28 जून 1991 को सेना में भर्ती होकर सिकंदराबाद स्थित 1 EME सेंटर में अपनी बेसिक ट्रेनिंग पूर्ण की। प्रशिक्षण के पश्चात उन्होंने विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएँ देते हुए वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में सांवाद सेक्टर में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी जिम्मेदारी युद्ध क्षेत्र में सेना के वाहनों एवं युद्ध में उपयोग होने वाले उपकरणों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित और समय पर मोर्चे तक पहुँचाना था, जो अत्यंत जोखिम भरा कार्य था।

जून 2020 में भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुए तनावपूर्ण हालात के दौरान भी उन्होंने शून्य डिग्री तापमान और विपरीत परिस्थितियों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और जानलेवा जोखिम के बीच सैन्य संसाधनों को युद्ध स्थल तक पहुँचाना उनके दायित्वों में शामिल रहा, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा और साहस के साथ निभाया।

सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी सूबेदार मेजर कौशिक समाज सेवा के कार्यों में अग्रणी हैं। शुभम नोदय विहार कॉलोनी, वार्ड क्रमांक 9, भाटापारा (चकरभाठा) क्षेत्र में वे लगातार सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते हुए लोगों की सहायता कर रहे हैं। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करना, आमजन की समस्याओं के समाधान में सहयोग देना और समाज को संगठित व जागरूक करना उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है।

उनकी जीवन यात्रा केवल एक सैनिक की कहानी नहीं बल्कि संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणादायक गाथा है, जो युवाओं को देश सेवा और समाज सेवा के लिए निरंतर प्रेरित करती है।

अन्य खबरें