जिंदगी रंग ही तो है

सफेद कागज़ पे जब कोई कल्पना उतर जाती है,
तो सूनी ज़िंदगी में भी रूह मुस्कुराती है,
खुशबू बनकर खिलती है भावनाओं की गहराई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
बच्चे की हँसी में देखो सतरंगी उजियारा,
माँ की ममता में छलकता है सवेरा न्यारा,
हर प्रेम की भाषा में होती सादगी और सच्चाई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
कभी मेहंदी के हरे में छिपी सगाई की बात,
कभी दुल्हन के लाल में बसी माँ की सौगात,
हर रंग की अपनी अलग है परछाई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
नीला आकाश जब छू ले दिल का आँगन,
तो मन भी उड़ता है पंछियों के संग-संग,
हर सुबह का सूरज देता नई रोनक, नई रुलाई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
कभी आँसू का मोती भी चमक देता है चेहरा,
कभी दर्द भी सिखा जाता है जीने का पहरा,
हर एहसास की अपनी अनूठी परछाई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
सफर है ज़िंदगी, कोई धूप, कोई छाँव,
हर चेहरे में मिलता नया नक़्श-ए-गुलज़ार गाँव,
अगर दिल में प्यार हो, तो मिटती हर तन्हाई —
रंग ही तो है जो दुनिया को रंगीन बनाती है।
