रायपुर प्रेस क्लब में सियासी भूचाल: भूपेश और विजय शर्मा में आंकड़ों का तीखा संग्राम, ‘गरीब के मकान’ पर भिड़े दिग्गज़

छत्तीसगढ़ की राजनीति में 15 सितंबर 2026 का दिन एक ऐतिहासिक घटनाक्रम का गवाह बना, जब राजधानी रायपुर के ‘रायपुर प्रेस क्लब’ के मंच पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के दो कद्दावर चेहरे—पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा—प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर सीधी ‘ओपन डिबेट’ में आमने-सामने आ गए। लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस सियासी जंग में आंकड़ों की बाजीगरी, आरोप-प्रत्यारोप और तीखे तंज खुलकर देखने को मिले।

​विवाद का सूत्रपात और 15 सितंबर की तारीख तय होने का घटनाक्रम

​इस डिबेट की नींव प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन और उसमें देरी को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही बयानबाजी से पड़ी।

​उपमुख्यमंत्री का दांव: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान गरीबों को मकान न मिलने का मुद्दा उठाते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल को खुली बहस की चुनौती दी थी। उन्होंने दावा किया था कि साय सरकार ने सत्ता में आते ही पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवासों को स्वीकृति दी और अब तक 11 लाख से अधिक आवास निर्मित कर दिए हैं।

​चुनौती की स्वीकृति: भूपेश बघेल ने इस चुनौती को स्वीकार किया और प्रेस क्लब के निष्पक्ष मंच पर आंकड़े रखने का ऐलान कर दिया।

​तारीख की मुकर्ररी: दोनों नेताओं की ओर से तारीखों और समय को लेकर चली खींचतान के बाद 15 सितंबर 2026 (सुबह 11:30 बजे) का समय तय हुआ। हालांकि, डिबेट के शुरू होने से पहले भूपेश बघेल ने यह भी तंज कसा कि कांग्रेस संचार विभाग को इसकी औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी और वे नाश्ता छोड़कर चर्चा में पहुंचे हैं।

​प्रेस क्लब डिबेट: आंकड़ों का संग्राम और तीखा वार-पलटवार

​डिबेट में दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने दावों को सही साबित करने के लिए आंकड़ों की बौछार कर दी।

​पूर्व सीएम भूपेश बघेल का दावा: बघेल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार के समय 2018 में स्वीकृत 3.48 लाख में से 1.39 लाख मकान पूरे हुए थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान छत्तीसगढ़ को राशि जारी नहीं की गई और पीएम आवास का पोर्टल जानबूझकर बंद कर दिया गया था। बघेल का कहना था कि उन्होंने कुल 6.97 लाख आवास स्वीकृत किए, लेकिन केंद्र की नाकेबंदी की वजह से काम प्रभावित हुआ।

​उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का पलटवार: विजय शर्मा ने बघेल के दावों को नकारते हुए कहा कि कोरोना काल में भी केंद्र सरकार की ओर से राशि भेजी जा रही थी और पोर्टल बंद होने की बात गलत है। शर्मा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि AI टूल Grok से पूछ लीजिए, सच सामने आ जाएगा। उन्होंने पूर्व टी.एस. सिंहदेव के इस्तीफे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि बघेल सरकार ने गरीबों का मकान रोका और राशि अपनी योजनाओं में डायवर्ट कर दी।

​दोनों पार्टियों के दावों का विश्लेषणात्मक मूल्यांकन

विषय

भाजपा (उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा) का पक्ष

कांग्रेस (पूर्व सीएम भूपेश बघेल) का पक्ष

स्वीकृति एवं निर्माण

साय सरकार ने 18 लाख आवास स्वीकृत किए; 5 वर्षों में 16,000 करोड़ रु. खर्च कर 11.75 लाख आवास बनाए।

कांग्रेस सरकार ने 7 लाख आवास स्वीकृत किए और लगभग 3 लाख मकान पूर्ण कराए।

देरी की वजह

कांग्रेस ने मैचिंग ग्रांट (राज्यांश) जारी नहीं किया और पोर्टल में सही जानकारी अपडेट नहीं की।

केंद्र सरकार ने राज्य का पैसा रोका और कोरोना काल में पोर्टल बंद कर दिया था।

राजनीतिक तंज

“आपने गरीबों की आह ली, इसलिए जनता ने सत्ता से बाहर कर दिया।”

“अगली बार बहस के लिए किसी समझदार को भेजना, छोटा रिचार्ज सिर्फ रील के लिए ठीक है।”

 

डिबेट का माहौल और परिणाम

​डिबेट के दौरान व्यवस्था को लेकर कुछ समय के लिए वरिष्ठ पत्रकारों में भी भारी नाराजगी दिखी। जैसे ही 1 घंटे 20 मिनट की यह बहस समाप्त हुई, प्रेस क्लब परिसर के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और जमकर नारेबाजी हुई, जिसे पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया।

​निष्कर्ष: इस डिबेट से यह स्पष्ट हो गया कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘गरीब का मकान’ केवल कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि दोनों ही दलों के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार है। जहां भाजपा इसे अपनी प्रशासनिक विफलता छिपाने का कांग्रेस का बहाना बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे केंद्र के सौतेले व्यवहार का शिकार बताकर खुद का बचाव कर रही है।

 

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