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सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा द्वारा शंकराचार्य जी के चातुर्मास्य की घोषणा, व्यवस्थाओं को लेकर कल बिलासपुर के LCIT मार्ग (शाह फ़ार्म हाउस) पर सनातनियों की महाबैठक।

पुण्य का महायोग: सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा द्वारा शंकराचार्य जी के चातुर्मास्य की घोषणा, व्यवस्थाओं को लेकर कल बिलासपुर के LCIT मार्ग (शाह फ़ार्म हाउस) पर सनातनियों की महाबैठक


​- गौवंश की रक्षा हेतु भीषण गर्मी व बरसात में भी अनवरत जारी रही 81 दिनों की कठिन ‘गविष्टि यात्रा’, अब छत्तीसगढ़ में होगा पूज्य महाराज जी का प्रवास
– विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष,वरिष्ठ अधिवक्ता हाई कोर्ट,पं विकास दुबे राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व हिंदू महासभा,राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पं श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार, लक्ष्मण पाल छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष ने शंकराचार्य जी की इस अद्वितीय तपस्या को किया कोटि-कोटि नमन करते हुए ‘विश्व हिंदू महासभा छत्तीसगढ़’ का आह्वान- शंकराचार्य जी के ऐतिहासिक स्वागत के आगाज़ के लिए कल की बैठक में अवश्य पहुँचें ।


​बिलासपुर/भारतीय संस्कृति में संन्यास आश्रम और चातुर्मास्य व्रत का सर्वोच्च महत्व है। ‘सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा’ प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार,

इस वर्ष उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती “१००८” महाराज जी का पावन ‘चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान’ जिला बेमेतरा के पावन तीर्थ ‘सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा’ में संवत २०८३ विक्रमी, आषाढ़ पूर्णिमा से भाद्रपद पूर्णिमा (तदनुसार 29 जुलाई से 26 सितंबर 2026) तक पूर्ण विधि-विधान से आयोजित होगा। शास्त्रों के अनुसार, संन्यासियों के चातुर्मास्य की सेवा से राजसूय और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है।

​भीषण गर्मी और बरसात में 81 दिनों की कठिन तपस्या कर छत्तीसगढ़ पहुँच रहे महाराज जी
गौमाता की रक्षा और उन्हें राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने के लिए पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज की राष्ट्रव्यापी ‘गविष्टि यात्रा’ भीषण गर्मी और मूसलाधार बरसात में भी अनवरत जारी रही। देश के विभिन्न राज्यों में अपनी 81 दिनों की अखंड यात्रा और कठोर साधना पूर्ण करने के पश्चात अब पूज्य महाराज जी छत्तीसगढ़ की पावन माटी में चातुर्मास्य प्रवास करने जा रहे हैं। शंकराचार्य जी की इस अति-कठिन तपस्या को देखकर जहाँ विधर्मी हैरान हैं, वहीं संपूर्ण सनातन समाज श्रद्धा से नतमस्तक है।
​इस युगपरिवर्तकारी अनुष्ठान की घोषणा पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण देवस समुद्र शास्त्री, वरिष्ठ पत्रकार एवं लक्ष्मण पाल (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़) ने शंकराचार्य जी के गो-रक्षा कार्य को कोटि-कोटि नमन करते हुए कल की महाबैठक का स्वागत किया है। महासभा ने समस्त सनातन प्रेमियों से आह्वान किया है कि राष्ट्रमाता गौमाता के सम्मान और महाराज जी के ऐतिहासिक स्वागत के आगाज़ (बैठक) में अवश्य पहुँचें।


​विश्व का अनूठा मंदिर: एक परिक्रमा से मिलेगा सवा लाख शिवलिंगों की परिक्रमा का पुण्य
धाम से मिली जानकारी के मुताबिक, सलधा में लगभग 5 एकड़ भूमि पर एशिया का सबसे बड़ा और अनूठा शिव मंदिर (ऊंचाई 108 फीट) आकार ले रहा है। यहाँ की अलौकिक विशेषता यह है कि श्रद्धालु ‘एक जगह, एक साथ, सवा लाख शिवलिंगों’ के दर्शन कर सकेंगे। इसके एक शिवलिंग में जल चढ़ाने से सवा लाख शिवलिंगों पर जल चढ़ाने और इसकी एक परिक्रमा मात्र करने से सवा लाख शिवलिंगों की परिक्रमा का अनंत पुण्य प्राप्त होगा। कोई भी श्रद्धालु यहाँ अपने पूर्वजों की आत्म-शांति हेतु नामजद शिवलिंग स्थापित करा सकता है।
​व्यवस्थाओं को ऐतिहासिक स्वरूप देने कल बिलासपुर में महामंथन
चातुर्मास्य की अभूतपूर्व व्यवस्थाओं (आवास, भोजन, सुरक्षा) को सुनिश्चित करने हेतु ‘सपाद लक्षेश्वर धाम चातुर्मास्य आयोजन सेवा समिति सलधा’ द्वारा एक आवश्यक महाबैठक बुलाई गई है। यह बैठक कल दिनांक 5 जुलाई 2026, दिन रविवार को शाम 4:00 बजे से बिलासपुर के LCIT कॉलेज मार्ग पर स्थित ‘कुंज कुटीर, शाह फ़ार्म हाउस’ (चिरचिदा रोड) में आयोजित होगी, जिसमें सभी सनातन धर्मप्रेमी, सामाजिक-धार्मिक संगठन और रामभक्त सादर आमंत्रित हैं।
​बैठक सूचना बॉक्स (मीडिया और अखबारों हेतु):
​सूचना स्रोत: सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा (बेमेतरा)
​तिथि व दिन: 5 जुलाई 2026, रविवार (शाम 4:00 बजे से)
​स्थान: कुंज कुटीर, शाह फ़ार्म हाउस, चिरचिदा रोड (LCIT कॉलेज से 1 किमी), बिलासपुर (छत्तीसगढ़)


​आयोजक: सपाद लक्षेश्वर धाम चातुर्मास्य आयोजन सेवा समिति, सलधा बेमेतरा छत्तीसगढ़

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