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सिरगिट्टी सुशासन शिविर में भारी जन-आक्रोश: कांग्रेस का शंखनाद, मूलभूत नागरिक अधिकारों के हनन का आरोप ​थाना प्रभारी  अभय सिंह बैस की त्वरित प्रशासनिक सूझबूझ और जुझारू कर्तव्यनिष्ठा से टला आसन्न वैधानिक संकट।

सिरगिट्टी सुशासन शिविर में भारी जन-आक्रोश: कांग्रेस का शंखनाद, मूलभूत नागरिक अधिकारों के हनन का आरोप
​थाना प्रभारी  अभय सिंह बैस की त्वरित प्रशासनिक सूझबूझ और जुझारू कर्तव्यनिष्ठा से टला आसन्न वैधानिक संकट।

बिल्हा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सिरगिट्टी में राज्य शासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित निवारण हेतु आयोजित ‘सुशासन शिविर’ (सुशासन तिहार) आज उस समय तीव्र राजनैतिक गतिरोध और वैचारिक द्वंद्व का केंद्र बन गया, जब ब्लॉक कांग्रेस कमेटी तिफरा एवं सिरगिट्टी मंडल कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं द्वारा जनहित की मांगों को लेकर गगनभेदी नारों के साथ उग्र विरोध प्रदर्शन किया गया। देखते ही देखते आयोजन स्थल पर सत्तापक्ष और प्रतिपक्ष के मध्य तीखी नोकझोंक प्रारंभ हो गई, जिससे वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति अत्यंत नाजुक और संवेदनशील हो गई।
​”सुशासन के नाम पर शासकीय धन का अपव्यय और जनभावनाओं से खिलवाड़” — प्रतिपक्ष
​प्रदर्शन का कमान संभाल रहे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने वर्तमान सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर तीखा प्रहार करते हुए इसे “सुशासन का छलावा” निरूपित किया। आंदोलनकारियों ने अत्यंत तल्ख लहजे में कहा कि:
​”सिरगिट्टी क्षेत्र की सम्मानित जनता आज भी विद्युत विच्छेद, शुद्ध पेयजल संकट, गुणवत्तापूर्ण जन-शिक्षा और सुदृढ़ चिकित्सा जैसी मूलभूत एवं अपरिहार्य आवश्यकताओं के लिए निरंतर संघर्ष कर रही है। ऐसी विकट परिस्थितियों में लोक-कल्याण के मूल उद्देश्यों को बिसराकर, शासकीय कोष के दुरुपयोग से केवल राजनैतिक लाभ हेतु आयोजनों का ढोंग रचा जा रहा है।”
​संकटमोचक की भूमिका में थाना प्रभारी अभय सिंह बैस: प्रशासनिक मिसाल से शांत हुआ आक्रोश
​जब शिविर प्रांगण में दोनों पक्षों के मध्य गतिरोध अपने चरम पर पहुंच गया और एक व्यापक हिंसक टकराव (बवाल) की स्थिति उत्पन्न होने ही वाली थी, तब स्थानीय पुलिस प्रशासन के सजग प्रहारी और थाना प्रभारी (एसएचओ) अभय सिंह बैस ने तत्परता से मोर्चे को संभाला।
​उल्लेखनीय है कि अभय सिंह बैस, जो पूर्व में तोरवा थाना’ क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट, निर्भीक और अत्यंत जुझारू कार्यशैली के लिए व्यापक रूप से प्रतिष्ठित रहे हैं, उन्होंने अपनी चिरपरिचित प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया। विपरीत परिस्थितियों में भी बिना विचलित हुए, अभय सिंह बैस ने दोनों पक्षों के मध्य अत्यंत सूझबूझ के साथ मध्यस्थता की। उनके इस जुझारू प्रयास और दृढ़ संकल्प के कारण कानून-व्यवस्था की गरिमा अक्षुण्ण रही और ‘सुशासन तिहार’ के मंच पर होने वाली एक अत्यंत अप्रिय व गंभीर दुर्घटना समय रहते टल गई।
​राजनैतिक प्रयोग बनाम जनहित का निस्तारण
​इस संपूर्ण घटनाक्रम ने जहां एक ओर क्षेत्र के सुलगते नागरिक मुद्दों को मुख्यधारा में ला दिया है, वहीं दूसरी ओर पुलिस बल के कुशल नेतृत्वकर्ता अभय सिंह बैस द्वारा संकट के क्षणों में निभाई गई महती भूमिका की आम जनता और प्रबुद्ध वर्ग द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि शासकीय शिविरों का वास्तविक संपादन तभी न्यायसंगत होगा, जब वे राजनैतिक प्रयोगों से ऊपर उठकर निष्पक्ष रूप से आम जनता की समस्याओं का स्थायी निस्तारण सुनिश्चित करेंगे। फिलहाल, पुलिस प्रशासन की कड़ी मुस्तैदी के कारण क्षेत्र में पूर्ण शांति और विधि व्यवस्था स्थापित है।

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