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बिलासपुर के ऐतिहासिक शनिचरी सब्जी मंडी में भीषण आगजनी: विद्युत विभाग की कथित लापरवाही पर फूटा व्यापारियों का आक्रोश।

बिलासपुर के ऐतिहासिक शनिचरी सब्जी मंडी में भीषण आगजनी: विद्युत विभाग की कथित लापरवाही पर फूटा व्यापारियों का आक्रोश, जांच आरंभ।

​बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। न्यायधानी बिलासपुर के ऐतिहासिक शनिचरी बाजार स्थित सब्जी मंडी में शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात एक हृदयविदारक एवं भीषण आगजनी की दुर्घटना घटित हुई। इस आकस्मिक विपदा में लगभग 14 से 15 व्यावसायिक प्रतिष्ठान (दुकानें) पूरी तरह जलकर स्वाहा हो गए, जिससे पीड़ित व्यापारियों को लाखों रुपये की अपूरणीय आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ा है। इस अग्निकांड से सर्वाधिक आघात आलू एवं प्याज के थोक व चिल्हर कारोबारियों को पहुंचा है।
​घटनाक्रम और प्रशासनिक तत्परता
प्रत्यक्षदर्शियों और प्राप्त विवरण के अनुसार, शनिवार तड़के लगभग 2:00 बजे अचानक सब्जी मंडी के एक हिस्से से धुएं का गुबार उठा और देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया। सघन बाजार क्षेत्र होने के कारण आग अत्यंत तीव्र गति से फैली। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और अग्निशमन दल (फायर ब्रिगेड) की टीमें मुस्तैदी से घटना स्थल पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों द्वारा कई घंटों की कठिन और अनवरत मशक्कत के बाद अंततः आग पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सका। समय रहते की गई इस प्रशासनिक त्वरित कार्रवाई के फलस्वरूप आग को विस्तृत बाजार क्षेत्र में फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक और बड़ा हादसा टल गया।
​विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप और जन-आक्रोश
इस भीषण दुर्घटना के उपरांत स्थानीय व्यापारियों और प्रभावित दुकानदारों में प्रशासनिक उदासीनता को लेकर भारी रोष व्याप्त है। पीड़ित व्यापारियों ने सीधे तौर पर विद्युत विभाग की घोर लापरवाही को इस त्रासदी का मुख्य कारण बताया है।
​व्यापारियों के अनुसार, शुक्रवार रात्रि लगभग 8:30 से 9:00 बजे के मध्य जब वे अपने प्रतिष्ठान बंद कर रहे थे, तब कतिपय दुकानों के लोहे के शटर में विद्युत प्रवाह (करंट) की शिकायत दर्ज की गई थी। इस आसन्न खतरे की सूचना तत्काल समीपस्थ विद्युत विभाग के कार्यालय को दी गई। शिकायत के बाद विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचे अवश्य, परंतु उन्होंने तकनीकी खराबी का स्थायी निराकरण करने के स्थान पर केवल अस्थायी रूप से बिजली आपूर्ति (सप्लाई) बंद कर दी और अगले दिन मरम्मत करने का आश्वासन देकर प्रस्थान कर गए। व्यापारियों का आरोप है कि यदि विभाग ने इस शिकायत को पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से लिया होता, तो इस वित्तीय और मानसिक क्षति से बचा जा सकता था।
​जांच एवं वैधानिक प्रक्रिया
प्रारंभिक आकलनों में दुर्घटना का कारण ‘शॉर्ट सर्किट’ होने की आशंका व्यक्त की जा रही है, किंतु स्थानीय व्यापारियों के गंभीर आरोपों के बाद प्रशासन ने मामले को संज्ञान में ले लिया है। पुलिस प्रशासन और संबंधित तकनीकी विभागों द्वारा इस पूरे प्रकरण की विस्तृत व निष्पक्ष जांच प्रारंभ कर दी गई है।
​यह घटना रेखांकित करती है कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में किसी भी स्तर पर बरती गई शिथिलता कितनी घातक सिद्ध हो सकती है। पीड़ित व्यापारी वर्ग ने शासन-प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय पारदर्शी जांच, दोषी कर्मचारियों पर दंडात्मक कार्रवाई तथा प्रभावित छोटे एवं मध्यम दुकानदारों के लिए उचित आर्थिक मुआवजे की मांग की है।

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