समुद्र शास्त्री के द्वारा शोक सभा बनी महा-संकल्प का केंद्र: यशोदा मां तुल्य चाची की स्मृति में छत्तीसगढ़ को हरा-भरा बनाने उमड़ा जनसैलाब
शोक सभा बनी महा-संकल्प का केंद्र: यशोदा मां तुल्य चाची की स्मृति में छत्तीसगढ़ को हरा-भरा बनाने उमड़ा जनसैलाब
बिलासपुर/छत्तीसगढ़:
पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ की श्रद्धेय चाची (यशोदा मां स्वरूप) के निधन के पश्चात आयोजित दसगात्र कार्यक्रम ने एक व्यापक सामाजिक चेतना का रूप ले लिया। गत 13 तारीख को हुए उनके दुखद निधन के बाद आज आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों और प्रबुद्ध जनों ने शामिल होकर शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट हुए संगठन:
इस अवसर पर विश्व मानव परमार ट्रस्ट, विश्व हिंदू महासभा, विश्व हिंदू सेवा दल, और अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना के पदाधिकारियों ने एक ऐतिहासिक सामूहिक संकल्प लिया। संस्थाओं ने घोषणा की कि स्व. चाची जी की पावन स्मृति में पूरे राज्य में युद्धस्तर पर वास्तविक वृक्षारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही कंक्रीटीकरण पर रोक लगाने और जल संरक्षण (Water Harvesting) के कार्यों को धरातल पर उतारने का संकल्प दोहराया गया। पदाधिकारियों ने कड़े शब्दों में सचेत किया कि यदि कागजी दावों को छोड़कर पौधों को बचाने के ठोस प्रयास नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियां इस तपती धरती के लिए हमें क्षमा नहीं करेंगी।
श्रद्धांजलि बनी सामाजिक एकजुटता का प्रतीक:
उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने एक स्वर में कहा कि यशोदा मां तुल्य चाची और युवा अक्षय कुलदीप को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब हम इस झुलसती धरती को दोबारा सुरक्षित और रहने योग्य बनाएं। यह कार्यक्रम केवल एक पारिवारिक शोक सभा तक सीमित न रहकर छत्तीसगढ़ के भविष्य को बचाने के लिए एक ‘महा-संकल्प’ में तब्दील हो गया।
कृतज्ञता और समापन:
कार्यक्रम के अंत में, दुःख की इस घड़ी में असीम संबल और वैचारिक सहभागिता प्रदान करने वाले सभी अतिथियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की गई। विशेष रूप से ज्योति कुलदीप (संचालिका, जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस) और उनके परिवार की ओर से पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ के मानवीय त्याग, माता विद्यावती देवी और बड़ी बहन सुमन ओझा के उच्च आदर्शों के प्रति विशेष आभार प्रकट किया गया।
प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
इस दुखद घड़ी में पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’, माता विद्यावती देवी, सुमन ओझा, राघवेंद्र सिंह (अमरस्तंभ), पुखराज सिंह (आरजे रामझाझर), राजेंद्र डहरिया (अध्यक्ष, हरिभूमि बिल्हा पत्रकार संघ), आदर्श लक्ष्मण पाल (संरक्षक, अहिल्याबाई होल्कर मुक्तिधाम), बंटी महाराज, आरती, शांति, मीना और जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस परिवार सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
