बोदरी नगर पालिका में दलित कर्मचारी से दुर्व्यवहार का आरोप, पार्षद पर जातिगत अपमान और धमकी का मामला गरमाया
बोदरी नगर पालिका में दलित कर्मचारी से दुर्व्यवहार का आरोप, पार्षद पर जातिगत अपमान और धमकी का मामला गरमाया

बोदरी। नगर पालिका परिषद बोदरी एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। यहां पदस्थ नियमित सफाई कर्मचारी महेंद्र राठौर के साथ कथित मारपीट, जातिगत अपमान और राजनीतिक दबाव का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और दलित वर्ग के साथ लगातार हो रहे अत्याचार को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महेंद्र राठौर पिछले 14 वर्षों से नगर पालिका में कार्यरत हैं। उन्हें मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) गहलोत द्वारा यूजर चार्ज वसूली के लिए भेजा गया था। इसी दौरान आनंद कपड़ा दुकान के संचालक ने उनके साथ कथित रूप से गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और अपमानजनक व्यवहार करते हुए दुकान से बाहर निकाल दिया।
पीड़ित कर्मचारी जब शिकायत लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे तो उन्हें एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई और शिकायत आवक-जावक में दर्ज भी हो गई। लेकिन इसी बीच मामला उस समय और गरमा गया जब आम आदमी पार्टी के पार्षद विजय वर्मा कार्यालय पहुंचे।
“दो कौड़ी के स्वीपर…” — चेंबर में ही अपमान का आरोप
महेंद्र राठौर का आरोप है कि पार्षद विजय वर्मा ने सीएमओ पर दबाव बनाते हुए उनके सामने ही कहा —
“व्यापारी हमारे हैं, इन दो कौड़ी के स्वीपरों को यूजर चार्ज काटने भेजोगे तो ऐसा ही होगा।”
पीड़ित का कहना है कि पिछले 10 दिनों से लगातार जातिगत गालियां, प्रताड़ना और सस्पेंड कराने की धमकी दी जा रही है।
अजाक थाने पहुंचा मामला
अपमान से आहत और मानसिक रूप से टूट चुके महेंद्र राठौर ने अजाक थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दी है। उनका कहना है कि यदि एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो वे नगर पालिका परिसर में आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।


दलित कर्मचारियों में आक्रोश
घटना के बाद सफाई कर्मचारियों और दलित समाज में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि नगर पालिका में लंबे समय से निम्न वर्ग के कर्मचारियों के साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
बड़े सवाल
क्या दलित कर्मचारियों को आज भी सम्मानजनक कार्य वातावरण नहीं मिल पा रहा?
राजनीतिक संरक्षण में कर्मचारियों का अपमान क्यों?
जातिगत टिप्पणी पर अब तक FIR क्यों नहीं?
चेतावनी
यदि मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो कर्मचारी संगठन और दलित समाज द्वारा आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
