बेलमुंडी धाम विवाद: सरपंच पति और पुत्र पर मंदिर तोड़फोड़ व जान से मारने की धमकी का आरोप, चकरभाठा थाने में बयान दर्ज

बेलमुंडी धाम विवाद: सरपंच पति और पुत्र पर मंदिर तोड़फोड़ व जान से मारने की धमकी का आरोप, चकरभाठा थाने में बयान दर्ज


बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले अंतर्गत बेलमुंडी धाम स्थित श्री पंचमुखी हनुमान जी महाराज मंदिर को लेकर उपजे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। बेलगुंडी ग्राम के सरपंच पति विश्राम कौशिक तथा उनके पुत्र पर मंदिर व आश्रम को तोड़ने-फोड़ने, पत्रकारों, पुजारियों और स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में चकरभाठा थाने में विधिवत बयान दर्ज कराया गया है।


प्रार्थी अंकित तिवारी उर्फ बंटी महाराज, जो कि श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी हैं, ने बताया कि सरपंच पति विश्राम कौशिक लंबे समय से मंदिर, आश्रम, तालाब तथा सेवा कार्यों से जुड़े लोगों को निशाना बना रहे हैं। आरोप है कि 10 जनवरी को पहली बार धमकी दी गई, और हाल ही में पुनः सरपंच पति के पुत्र प्रफुल्ल कौशिक ने मोबाइल फोन पर पत्रकारों, पुजारी और स्वयं सहायता समूह के पदाधिकारियों को नुकसान पहुँचाने व “देख लेने” की धमकी दी। इस धमकी का वीडियो क्लिप भी उपलब्ध होने का दावा किया गया है।
पत्रकार और स्वयं सहायता समूह भी निशाने पर
मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि धमकी केवल पुजारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकारों और आश्रम की सेवा में लगे विश्व महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, क्राइम फ्री इंडिया मिशन, विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट सहित अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों को भी खुलेआम डराने का प्रयास किया गया।


पीड़ित पक्ष का कहना है कि धमकी देने वाले स्वयं को स्थानीय विधायक धरमलाल कौशिक के भाई का नाम लेकर प्रभावशाली बताने का प्रयास करते हैं, जिससे भय का माहौल बनाया जा रहा है।
एसपी के आदेश के बावजूद बढ़ी गतिविधि
इस पूरे मामले में बिलासपुर पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह द्वारा पहले ही जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश चकरभाठा थाना को दिए जा चुके हैं। बावजूद इसके, धमकियों का सिलसिला रुकने के बजाय बढ़ता जाना प्रशासनिक ढिलाई पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।


उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व चकरभाठा थाना प्रभारी उमेश साहू द्वारा मंदिर परिसर में शांति गोष्ठी आयोजित कर सामाजिक सौहार्द की अपील की गई थी, जिसमें पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया। इसके उलट, ज़मीनी स्तर पर हालात और अधिक तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।
आपात बैठक, ज्ञापन और आंदोलन की चेतावनी
लगातार मिल रही धमकियों को देखते हुए बेलमुंडी धाम में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि संवैधानिक तरीके से संघर्ष किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।


इस बैठक में वरिष्ठ पत्रकार अमर स्तंभ आरजे रमझाझर, समुद्र शास्त्री, पुखराज सिंह, श्रवण दुबे सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और महिला स्वयं सहायता समूह की पदाधिकारी उपस्थित रहीं। सभी ने एक स्वर में मंदिर, आश्रम और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
बड़ा सवाल: जब मंदिर तोड़ने की धमकी हिंदू कहने वाले दे रहे हों?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपित स्वयं को हिंदू बताकर मंदिर तोड़ने और धर्मस्थलों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल धार्मिक आस्था बल्कि कानून व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता—तीनों पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
सामाजिक संगठनों का स्पष्ट कहना है कि
यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की,
तो ऐसे तत्वों के हौसले और बढ़ेंगे,
और इसका सीधा असर धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, पत्रकारों की स्वतंत्रता और सामाजिक सौहार्द पर पड़ेगा।


निष्कर्ष
बेलमुंडी धाम का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है। यह धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून के राज की वास्तविक परीक्षा बन चुका है।
अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते सख्त कदम उठाता है या नहीं, क्योंकि यदि ऐसे मामलों में भी ढिलाई बरती गई, तो इसके दूरगामी और खतरनाक परिणाम होंगे।

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