खबर का असर: फुलझर स्कूल मामले में शिक्षा विभाग ने लिया कड़ा संज्ञान, बच्चों से टेबल उठवाने और बदसलूकी करने वाले शिक्षक पर जल्द होगी कार्रवाई

लोरमी (छत्तीसगढ़):

‘RJ रमझाझर न्यूज़’ चैनल की खबर का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है। लोरमी विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम फुलझर के शासकीय प्राथमिक शाला में मासूम स्कूली बच्चों से भारी टेबल उठवाने और कवरेज करने पहुंचे पत्रकार के साथ शिक्षक द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने के मामले को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। खबर के प्रकाशन के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इस पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए दोषी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

​क्या था पूरा मामला?

​बीते दिनों ग्राम फुलझर के शासकीय प्राथमिक शाला का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों से भारी-भरकम टेबल उठवाए जा रहे थे। जब इस गंभीर मामले की जमीनी हकीकत जानने और सच सामने लाने के लिए RJ रमझाझर न्यूज़ के पत्रकार मौके पर पहुंचे, तो संबंधित शिक्षक ने अपनी लापरवाही छिपाने के बजाय पत्रकारों को स्कूल में प्रवेश करने से ही रोक दिया। शिक्षक द्वारा यहां तक कहा गया कि “स्कूल में अंदर आने से पहले ऊपर से आदेश लेकर आइए।” शिक्षा के मंदिर में इस तरह की तानाशाही और बच्चों से श्रम कराने का मामला सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था।

​जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) का स्पष्ट बयान: “पत्रकारों को किसी आदेश की जरूरत नहीं”

​इस पूरे मामले के तूल पकड़ने और हमारे चैनल पर प्रमुखता से खबर दिखाए जाने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी मोहनलाल पटेल ने मीडिया से खुलकर चर्चा की।

​DEO मोहनलाल पटेल ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि सामान्य परिस्थितियों में पत्रकारों को स्कूलों में प्रवेश करने या रिपोर्टिंग करने के लिए किसी भी अधिकारी से विशेष आदेश लेने की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने कहा कि पत्रकार जनहित से जुड़े मुद्दों की जानकारी के लिए संस्था प्रमुख को सूचना देकर विद्यालय की जानकारी ले सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि परीक्षाएं चल रही हों, तो गोपनीयता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों से अनुमति या पास लेना अनिवार्य होता है, लेकिन सामान्य दिनों में इस तरह की रोक-टोक और बदसलूकी पूरी तरह गलत है।

​कार्रवाई की जगी उम्मीद, टिकी हैं सबकी निगाहें

​RJ रमझाझर न्यूज़ द्वारा इस खबर को प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद अब शिक्षा विभाग के हरकत में आने से ग्रामीणों और अभिभावकों में न्याय की उम्मीद जग गई है। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और मीडिया के अधिकारों पर धौंस जमाने वाले ऐसे लापरवाह शिक्षक पर अब प्रशासन क्या और कितनी सख्त कार्रवाई करता है, इस पर पूरे क्षेत्र की पैनी नजर बनी हुई है।

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