गोलियों से पथराव तक, संसद की दहलीज से देशव्यापी आक्रोश: चंद्रशेखर आजाद पर हमले के खिलाफ छत्तीसगढ़ और पूरे देश में फूटा भीम आर्मी का गुस्सा; बिलासपुर में एसपी-कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
लखनऊ/बिलासपुर:
सड़क के संघर्ष से निकलकर संसद की दहलीज तक पहुंचे भीम आर्मी के संस्थापक, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ एक बार फिर जानलेवा हमले और प्रशासनिक उत्पीड़न के शिकार हुए हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में उनके काफिले पर हुए भीषण पथराव, तोड़फोड़ और हमले के खिलाफ उत्तर प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में भीम आर्मी और बहुजन समाज के समर्थकों में आक्रोश की तीव्र लहर दौड़ गई है।
1. ताजा घटना: बाराबंकी में चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर हमला और जानलेवा साजिश
गोंडा जिले में हुए विनोद साहनी हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को बाराबंकी जिले के बुढ़वल-रामनगर क्षेत्र (शाहपुर टोल के पास) में पुलिसिया घेराबंदी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के बीच उपद्रवियों ने उनके काफिले को रोका, जमकर गाली-गलौज की और अंधाधुंध पत्थरबाज़ी व जूते फेंके।
गाड़ियों में तोड़फोड़ व दर्जनों घायल: इस हमले में सांसद के काफिले की 7 से 8 गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और करीब 13-14 कार्यकर्ता चोटिल हुए।
हत्या की साजिश का बड़ा आरोप: सांसद चंद्रशेखर आजाद ने खुलासा किया कि उन्हें रोकने की यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक बाधा नहीं थी, बल्कि एक फार्म हाउस में उनकी हत्या का षड्यंत्र रचा गया था। गाड़ियों में आग लगाने के इरादे से लोग बोतलों में पेट्रोल-डीजल लेकर घूम रहे थे।
एसपी ऑफिस घेराव और अल्टीमेटम: घटना के तुरंत बाद चंद्रशेखर आजाद ने सैकड़ों समर्थकों संग बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो देशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा।
2. देशव्यापी आक्रोश और छत्तीसगढ़ (बिलासपुर) में भीम आर्मी का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश में सांसद चंद्रशेखर आजाद पर हुए हमले और दुर्व्यवहार की खबर फैलते ही उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश और छत्तीसगढ़ में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए।

कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन: बिलासपुर भीम आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट कार्यालय और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर जिला प्रशासन को राष्ट्रपति व केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रमुख मांगें:
बाराबंकी हमले में शामिल सभी दोषियों और इसके पीछे रची गई साजिश के मास्टरमाइंड्स की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद को सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल पर्याप्त उच्च स्तरीय (Z+) सुरक्षा व्यवस्था प्रदान की जाए।
गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच कराकर पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
आंदोलन की चेतावनी: बिलासपुर भीम आर्मी के नेताओं ने कड़े शब्दों में चेताया कि यदि जनप्रतिनिधि और बहुजन नेता पर इस तरह के जानलेवा हमले जारी रहे और दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक भीम आर्मी उग्र प्रदर्शन करेगी।

3. पूर्व में हुए जानलेवा हमले और काल-घटी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब चंद्रशेखर आजाद पर जानलेवा हमला हुआ हो। बहुजन राजनीति में एक उग्र, आक्रामक और बेबाक चेहरे के रूप में उभरे चंद्रशेखर का सफर हमेशा से खतरों से घिरा रहा है:
जून 2023 का देवबंद कातिलाना हमला: सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र में हथियारबंद हमलावरों ने चंद्रशेखर की गाड़ी पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। उस दौरान एक गोली उनके पेट की खाल को छूती हुई (स्क्रैच करती हुई) निकल गई थी।
2017 का शब्बीरपुर विवाद और रासुका (NSA): सहारनपुर के शब्बीरपुर जातीय संघर्ष के बाद सरकार के सीधे निशाने पर आए चंद्रशेखर पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया था, जिसे बाद में जनदबाव में हटाना पड़ा।
सीएए-एनआरसी और दिल्ली जामा मस्जिद गिरफ्तारी: 2019-2020 में दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के बाहर हाथ में संविधान की प्रति लेकर प्रदर्शन करते हुए उनकी नाटकीय गिरफ्तारी ने राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा था।
4. वर्तमान सक्रियता एवं राजनीतिक एजेंडा
तमाम हमलों और प्रशासनिक बाधाओं के बावजूद चंद्रशेखर आजाद की राजनीतिक पकड़ बेहद मजबूत हुई है:
नगीना से ऐतिहासिक जीत: 2024 के लोकसभा चुनावों में नगीना सीट से बिना किसी बड़े राजनीतिक गठबंधन के 1.5 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीतकर वे संसद पहुंचे।
संसद से सड़क तक उठते प्रमुख मुद्दे:
दलित-पिछड़ों पर अत्याचार के खिलाफ न्याय: गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड जैसे मामलों में मौके पर पहुंचकर सीबीआई (CBI) जांच और पीड़ितों के लिए मुआवजा मांगना।
पेपर लीक और युवा अधिकार: नीट (NEET) समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ युवाओं की आवाज बनना।
आरक्षण व संविधान सुरक्षा: सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुरक्षा और न्यायपालिका (कॉलेजियम प्रणाली) में दलितों-पिछड़ों के प्रतिनिधित्व की मांग उठाना।
सड़कों पर गोलियां व पत्थर झेलने से लेकर संसद में हुंकार भरने तक, चंद्रशेखर आजाद रावण पर लगातार हो रहे ये हमले और बिलासपुर व छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश में फूटा आक्रोश यह साबित करता है कि वे बहुजन राजनीति के ऐसे केंद्र बिंदु बन चुके हैं, जिनकी आवाज को दबा पाना आसान नहीं है।
