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सनातन धर्म के महान संरक्षक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व द्विपीठाधीश्वर पूज्यपाद ब्रह्मलीन जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का 102वां वर्द्धन्ति (जयंती)सपाद लक्षेश्वर धाम में श्रद्धापूर्वक मनाया गया।

सपाद लक्षेश्वर धाम में श्रद्धापूर्वक मनाया गया ब्रह्मलीन शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी का 102वां वर्द्धन्ति महोत्सव
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सनातन धर्म के महान संरक्षक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व द्विपीठाधीश्वर पूज्यपाद ब्रह्मलीन जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का 102वां वर्द्धन्ति (जयंती) महामहोत्सव भाद्रपद शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर सपाद लक्षेश्वर धाम, सलधा (जिला बेमेतरा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक परंपरा के साथ संपन्न हुआ।
​महामहोत्सव का आयोजन उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठ के जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य एवं सपाद लक्षेश्वर धाम के पूज्य ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द जी महाराज सहित अनेक वरिष्ठ संतों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
​वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पादुका पूजन
प्रातः काल से ही धाम परिसर में देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्य अनुष्ठान के तहत जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज एवं उपस्थित आचार्यों द्वारा विधि-विधानपूर्वक पूज्यपाद ब्रह्मलीन महाराज श्री की पादुका का पूजन किया गया और पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस दौरान संपूर्ण परिसर वैदिक ऋचाओं और “जय जगद्गुरु” के जयघोष से गुंजायमान रहा।


​धर्मसभा में दिए आशीर्वचन
पादुका पूजन के उपरांत आयोजित विशाल धर्मसभा में पूज्य शङ्कराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने सारगर्भित आशीर्वचन प्रदान किए। उन्होंने ब्रह्मलीन शङ्कराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी द्वारा गो-रक्षा, सनातन धर्म के संरक्षण, वैदिक शिक्षा के प्रसार और देश के स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए अप्रतिम योगदान का स्मरण कराया तथा श्रद्धालुओं से उनके दिखाए सन्मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
​समारोह के समस्त धार्मिक अनुष्ठानों और धर्मसभा का डिजिटल माध्यमों से सीधा प्रसारण भी किया गया, जिसके माध्यम से देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं ने आभासी रूप से इस पावन अवसर का धर्म लाभ उठाया।

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