मुंगेली में मुनाफाखोरों की ‘दादागिरी’: MRP से ज्यादा वसूली पर अड़े दुकानदार, ‘खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग’ सोया गहरी नींद में

मुंगेली में मुनाफाखोरों की ‘दादागिरी’: MRP से ज्यादा वसूली पर अड़े दुकानदार, ‘खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग’ सोया गहरी नींद में

​मुंगेली।

जिला मुख्यालय सहित पूरे मुंगेली क्षेत्र में इन दिनों खाद्य सामग्री और पैकेट बंद सामानों की बेतहाशा कालाबाजारी और ओवररेटिंग (MRP से अधिक दाम वसूलना) का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आलम यह है कि चिल्लर (खुदरा) विक्रेताओं से लेकर बड़े थोक व्यापारी तक आम जनता की जेब पर खुलेआम डाका डाल रहे हैं। ब्रांडेड हो या नॉन-ब्रांडेड, हर पैकेट बंद सामग्री पर छपे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को ताक पर रखकर मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।

​”चाहिए तो लो, वरना आगे बढ़ो”: ग्राहकों को मिल रही धमकी

​जब भी कोई जागरूक नागरिक या आम उपभोक्ता एमआरपी से ज्यादा पैसे लिए जाने का विरोध करता है, तो उसे शालीनता की जगह दुकानदारों की बदतमीजी का सामना करना पड़ता है। दुकानदार सीधे तौर पर हेकड़ी दिखाते हुए कहते हैं— “चाहिए तो लो, वरना मत लो… जहां शिकायत करना है, कर दो!”

​विशेष रूप से मुंगेली जिला के ‘दाऊ पारा’ और ‘पड़ाव चौक’ स्थित खाद्य सामग्री विक्रेता और पान ठेले वालों की दादागिरी चरम पर है। इन प्रमुख चौराहों पर ग्राहकों के साथ सरेआम दुर्व्यवहार किया जा रहा है और कानून का कोई खौफ इन व्यापारियों में नजर नहीं आता।

​धूम्रपान और सिगरेट पर ‘लूट’ का गणित

​खाद्य सामग्रियों के अलावा, इस समय सबसे बड़ी मनमानी धूम्रपान और सिगरेट जैसी चीजों पर देखी जा रही है। इन उत्पादों पर तय एमआरपी से 20% तक ज्यादा रकम वसूली जा रही है। लूट का गणित कुछ इस प्रकार है:

सामग्री / सिगरेट डिब्बी

तय एमआरपी (MRP)

वसूली जा रही कीमत

अतिरिक्त मुनाफा (अवैध)

कैटेगरी 1

₹50

₹60

+ ₹10

कैटेगरी 2

₹60

₹70

+ ₹10

कैटेगरी 3

₹100

₹120

+ ₹20

 

सुशुप्तावस्था में ‘खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग’

​आखिर इन छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? इसका सीधा और साफ जवाब है— मुंगेली जिले के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की निष्क्रियता।

​विभाग लंबे समय से गहरी नींद में सोया हुआ है। न तो बाजारों में औचक निरीक्षण किया जा रहा है और न ही रेट लिस्ट की जांच हो रही है। अधिकारियों की इसी ‘सुशुप्तावस्था’ (ढीले रवैए) का फायदा उठाकर मुनाफाखोरों ने समानांतर अर्थव्यवस्था चला रखी है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग की खामोशी ही इन कालाबाजारियों के लिए मौन समर्थन बन चुकी है।

जागने का वक्त: कब होगी कार्रवाई?

​लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट (मापविज्ञान अधिनियम) के तहत एमआरपी से एक रुपया भी ज्यादा वसूलना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद मुंगेली की सड़कों और दुकानों पर सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

मुख्य मांग: आम जनता अब जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से यह सवाल पूछ रही है कि आखिर मुंगेली के नागरिकों को इस आर्थिक शोषण से कब मुक्ति मिलेगी? क्या विभाग कुंभकर्णी नींद से जागकर दाऊ पारा और पड़ाव चौक के इन ‘हौसले बुलंद’ व्यापारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई (जैसे जुर्माना या दुकान सील करना) करेगा, या फिर जनता यूं ही लुटती रहेगी?

 

प्रशासन को तत्काल प्रभाव से मुंगेली के प्रमुख बाजारों में ‘विशेष जांच दल’ भेजकर औचक छापेमारी करनी चाहिए, ताकि इन जमाखोरों और दादागिरी करने वाले दुकानदारों को कड़ा संदेश दिया जा सके।

 

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