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शांतिकुंज आश्रम परिसर के समीप में सनातन चेतना संगोष्ठी संपन्न;

शांतिकुंज आश्रम परिसर में सनातन चेतना संगोष्ठी संपन्न;

विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट के को प्रकोष्ठ प्रभारी रामेश्वर पांडे उर्फ समसानी फक्कड़ बाबा, सक्रिय सदस्य बलदाऊ रजक ने सामाजिक विसंगतियों पर व्यक्त की गंभीर चिंता
​ एयरपोर्ट मार्ग पर आयोजित वैचारिक समागम में लोक-कल्याण हेतु संतों का हुआ पावन वंदन, सुशासन तिहार की व्यवस्थागत कमियों पर भी हुआ विमर्श।

एयरपोर्ट मार्ग स्थित शांतिकुंज आश्रम के समीप समुद्र शास्त्री संस्थान के तत्वावधान में एक दिवसीय सांस्कृतिक-धार्मिक विचार गोष्ठी एवं महायज्ञ का आयोजन संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि अध्यात्म और सनातन धर्म के सामाजिक कार्यों में सदैव अग्रणी रहने वाले प्रखर सनातनी तथा विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट के गौ प्रकोष्ठ प्रभारी छत्तीसगढ़ रामेश्वर पांडे उर्फ समसानी फक्कड़ बाबा,सक्रिय सदस्य बलदाऊ रजक के नेतृत्व में समुद्र शास्त्री संस्थान पूर्व में भी इस पावन परिसर में अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का सफल संचालन कर चुका है। इसी गौरवशाली परंपरा को निरंतरता देते हुए इस वर्ष भी शांतिकुंज आश्रम के समीप इस विराट वैचारिक समागम को आकार दिया गया।
​कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रामेश्वर पांडेय उर्फ समसानी फक्कड़ बाबा संस्थान के संयोजक सक्रिय सदस्य बलदाऊ रजक ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में समाज, मानवीय मूल्यों और पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था में आ रहे गंभीर सामाजिक दुष्परिणामों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से मातृशक्ति (महिला सुरक्षा) और बालकों के नैतिक विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि जो सामाजिक विकृतियां कभी कल्पना से परे थीं, वे आज धरातल पर खुली चुनौती बनकर खड़ी हैं। आने वाली पीढ़ी को पुनर्विशोषित और सुसंस्कृत करने के लिए समाज को पुनः अपनी सनातनी जड़ों और नैतिक संस्कारों की ओर लौटने की आवश्यकता है।
​गुरुकुल परंपरा का पुनरुद्धार एवं यज्ञीय संकल्प:।

इस अवसर पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण ने बलदाऊ रजक को उनकी सुरक्षात्मक और सनातनी भावनाओं से समाज को निरंतर प्रेरित करने के लिए सम्मानित किया। परिचर्चा में प्रबुद्ध विद्वानों ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए रेखांकित किया कि भारत अनादिकाल से हमेशा सर्वोच्च शिखर पर रहा है क्योंकि यज्ञ हमारे वेदों का मूल विधिक विधान है। वर्ष 1947 में ढाई लाख गुरुकुलों को बंद कर जिस यज्ञीय विधान की श्रृंखला को रोका गया, सामाजिक व नैतिक अवमूल्यन उसी का दुष्परिणाम है। इस विसंगति को दूर करने के लिए मंच से यह संकल्प लिया गया कि अब प्रत्येक मोहल्ले में शैक्षणिक केंद्रों के माध्यम से प्रति रविवार यज्ञ अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जहाँ साक्षात यज्ञ देवता के सम्मुख आम जनमानस के कल्याण हेतु अर्जी लगाई जाएगी।


​देवी-देवताओं की आराधना एवं पूज्य संतों का अभिवादन:
कार्यक्रम के मुख्य पड़ाव में उपस्थित जनसमूह ने देवी-देवताओं का आह्वान किया और देश-प्रदेश के पूज्य संतों का भावभीनी कृतज्ञता के साथ अभिवादन कर क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर भागीरथी के पावन तट पर पिछले 15 वर्षों से लोक-कल्याण के लिए निरंतर कठिन तपस्या में लीन ‘मानव परमार्थ लीगल एंड सोशल ग्रुप ट्रस्ट’ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रद्धेय नंदू बाबा की अटूट तपस्या को नमन किया गया।
​साथ ही, अनसूया आश्रम के संस्थापक एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष परम श्रद्धेय शंभू पुरी महाराज के दिव्य लोक-कल्याणकारी कार्यों को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन किया गया, जिनके आध्यात्मिक संरक्षण में देश के विभिन्न राज्यों में सनातनी चेतना का प्रवाह अक्षुण्ण बना हुआ है। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी राष्ट्रनायक रामप्रसाद बिस्मिल के राष्ट्रवाद और गौ माता के संरक्षण हेतु पूज्य शंकराचार्य के संघर्षों को भी नमन किया गया। इसी श्रृंखला में आगामी 13 व 14 जून को सरोज निवास (छैराहा इटावा) में प्रख्यात विधि विशेषज्ञों— संजय कुमार दुबे एडवोकेट, राजीव कुमार दुबे एडवोकेट और मोहित दुबे एडवोकेट द्वारा आयोजित होने जा रहे “श्री हरी नाम संकीर्तन” महायज्ञ की रूपरेखा भी साझा की गई।
​सुशासन तिहार 2026: आंकड़ों से आगे व्यवस्था पर आत्ममंथन:
इस सांस्कृतिक समागम के समांतर, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ की विदाई वेला पर एक प्रशासनिक समीक्षा भी प्रस्तुत की गई। शासकीय आंकड़ों के अनुसार शिविरों में कुल 6,47,138 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 6,20,766 मांगें और 26,372 शिकायतें शामिल हैं।
​इस अवसर पर प्रबुद्ध वर्ग ने मत व्यक्त किया कि यदि इस अभियान को केवल भौतिक शिविरों तक सीमित न रखकर ऑनलाइन माध्यमों से भी जोड़ा जाता, तो यह संख्या कई लाख और अधिक होती। सुशासन की वास्तविक सफलता जिला प्रशासन (कलेक्टर) एवं पुलिस प्रशासन (पुलिस अधीक्षक) की संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। यदि अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि आपसी समन्वय से जनसुनवाई को सुदृढ़ करें, तो निचले स्तर पर ही समस्याओं का त्वरित समाधान संभव है।
​निष्कर्ष संदेश: “यदि व्यवस्था समय पर लोक-आकांक्षाओं को सुन ले, तो शिकायतें स्वतः समाप्त हो जाती हैं और तंत्र के प्रति अटूट विश्वास का सृजन होता है।”
​(सनातनी चिंतन, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और समसामयिक विमर्श के तीव्र प्रचार-प्रसार हेतु ‘धर्म संसद व्हाट्सएप ग्रुप’ से अवश्य जुड़ें और इस वैचारिक चेतना को जन-जन तक प्रसारित करने में अपना अमूल्य योगदान दें।)

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