डिडीनेश्वरी पुनर्स्थापना महोत्सव: भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए अजय शर्मा धमनी बिलासपुर।
डिडीनेश्वरी पुनर्स्थापना महोत्सव: भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए अजय शर्मा धमनी
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष व ट्रस्ट अध्यक्ष भाई अनिल कैवर्त की अगुवाई में माँ के दरबार से पातालेश्वर महादेव तक निकली ऐतिहासिक मिलन यात्रा
मल्हार (बिलासपुर) / मल्हारगढ़ | ०८ जून २०२६ (विशेष वृत्तांत)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और पारंपरिक अनुष्ठान:
पुरातत्व और आस्था की पावन नगरी मल्हार में माँ डिडीनेश्वरी देवी के ३६वें पुनर्स्थापना दिवस पर रविवार (०७ जून) को विशेष पूजन, महा-आराधना और भव्य शोभायात्रा का आयोजन परंपरा अनुसार संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि सन १९९१ की चोरी की दुखद घटना के बाद, जब माँ की पावन प्रतिमा पुनः प्राप्त हुई, तब ०७ जून १९९१ को स्वर्गीय पंडित टीकाराम शास्त्री ने विधि-विधान से माँ के विग्रह की पुनर्स्थापना कराई थी। तभी से प्रतिवर्ष इस ऐतिहासिक व पावन दिवस को संपूर्ण नगरवासी पूर्ण श्रद्धाभक्ति और सेवाभाव के साथ मनाते आ रहे हैं।
ऐसी मान्यता है कि प्रतिवर्ष इसी पावन दिन माता डिडीनेश्वरी स्वयं नगरवासियों को दर्शन देने के लिए पूरे नगर में भ्रमण करती हैं, यही कारण है कि इस भव्य शोभायात्रा का इंतजार लोगों को रहता है। इस वर्ष भी रविवार की सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आचार्य मयंक पांडेय, दीपक तिवारी एवं आचार्यों ने माता के विग्रह का पंचामृत, गंगाजल व ३२ प्रकार की अभिषेक सामग्रियों से विशेष महा-अभिषेक किया। इसके पश्चात माता का भव्य श्रृंगार कर मंगलाचरण, स्वस्तिवाचन, संकल्प, राजोपचार पूजन व विधिपूर्वक हवन संपन्न हुआ, जिसके बाद शाम को भव्य मंगल आरती की गई।
शोभायात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब: अजय शर्मा धमनी की गरिमामयी उपस्थिति:
इस पावन अवसर पर माँ के भव्य दरबार से लेकर पातालेश्वर महादेव दरबार तक एक अद्वितीय और ऐतिहासिक शोभायात्रा (मिलन यात्रा) निकाली गई। मंदिर के नए कलेवर को आकार देने वाले पर्यटन मण्डल के पूर्व सदस्य और क्षेत्र के प्रबुद्ध व्यक्तित्व अजय शर्मा धमनी मुख्य रूप से इस कार्यक्रम व शोभायात्रा में शामिल हुए। उनके लिए ०७ जून का यह पवित्र दिन दुनिया की समस्त संपदा और ऐश्वर्य प्राप्त कर लेने वाले अलौकिक अनुभव के समान रहा, जहाँ उन्हें माँ की सेवा और नगर की संस्कृति का हिस्सा बनने का सौभाग्य पुनः मिला।
अतीत की सेवा, वैचारिक भंवर और पुनरागमन का सौभाग्य:
इस ऐतिहासिक मंदिर की भव्यता के पीछे जनभागीदारी और निष्काम सेवा का एक लंबा इतिहास रहा है। वर्ष २००८ के उस दौर को स्मरण करना प्रासंगिक है जब माँ के भव्य दिव्य मंदिर निर्माण कार्य में तत्कालीन अध्यक्ष और प्रिय मित्र हीरा सिंह, आदरणीय लेनू गुरुजी, संतोष जी, अभियंता हरिश्चंद्र जी और समाज के वयोवृद्ध मुखिया पटवारी जी ने मिलकर कार्य किया था, जिसमें सेवा का सौभाग्य (सफरीहा) प्राप्त हुआ था। कालान्तर में, मंदिर की भव्यता स्थापित होने के बाद, किसी नए व्यक्ति के वैचारिक भंवर जाल और परिस्थितियों के कारण कई समर्पित सेवकों को माँ की प्रत्यक्ष सेवा से कुछ समय के लिए दूरी बनानी पड़ी थी।
परंतु सत्य और निष्ठा की कभी पराजय नहीं होती। वर्तमान ट्रस्ट अध्यक्ष भाई अनिल कैवर्त (पूर्व अध्यक्ष, नगर पंचायत) और उनके सभी सहयोगी साथियों ने बड़प्पन और सनातन समन्वय का परिचय देते हुए पुराने समर्पित सहयोगियों को पुनः यह पावन अवसर प्रदान किया, जो अत्यंत साधुवाद के पात्र हैं। इस गौरवमयी पुनरागमन और सौभाग्य को नगर के पुरातात्विक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व को निरंतर प्रचारित करने वाले ऊर्जावान बंधु द्वय संजीव और राजेश के साथ-साथ हरिशंकर पांडेय जी ने भी सराहा और इसे मीडिया के माध्यम से लोक-पटल पर लाया।
संपादकीय संदेश: ‘सुमता सलाह’ से संवरेगी धरोहर:
”यदि हम सब ‘सुमता सलाह’ (सद्बुद्धि और आपसी सामंजस्य) के साथ जनभागीदारी को हथियार बनाकर अपनी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को संवारने का एक राष्ट्रव्यापी जन-आंदोलन चलाएं, तो सरकार को भी हमारे पीछे चलना होगा। आइए सब मिलकर धरोहर संवारे।”
इस संपूर्ण मांगलिक प्रसंग, दिव्य अभिषेक और भव्य मिलन यात्रा की गौरवमयी गाथा को प्रामाणिकता के साथ समाज के सामने लाने में धमनी से हरिभूमि के वरिष्ठ संवाददाता रामकुमार यादव और उनके साथी सहयोगियों का योगदान सराहनीय रहा, जिन्होंने इस सात्विक और ऐतिहासिक वृत्तांत को शब्दों में पिरोकर जन-जन तक पहुँचाया।
चित्र सौजन्य एवं उपस्थिति: पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत व मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष भाई अनिल कैवर्त, श्री अजय शर्मा धमनी, धमनी से रामकुमार यादव एवं मंदिर ट्रस्ट के समस्त सम्मानित सदस्य गण के साथ जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस बोदरी तहसील मुख्य रूप से शामिल धर्म संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शमशान वासनिक फक्कड़ बाबा ने सबको सर्वे भवंतु का आशीर्वाद दिया।

