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​बिलासपुर: दोस्ती हुई लहूलुहान; कोनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर।

बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ दोस्ती के रिश्ते को शर्मसार करते हुए एक युवक ने अपने ही दोस्त पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। प्राप्त जानकारी और साझा की गई तस्वीर के आधार पर तैयार की गई विस्तृत खबर इस प्रकार है:

  1. ​बिलासपुर: दोस्ती हुई लहूलुहान; कोनी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, आरोपी अब भी गिरफ्त से बाहर ।

 

​बिलासपुर। न्यायधानी में अपराध के ग्राफ के साथ-साथ अब पुलिस की कार्यशैली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। ताजा मामला कोनी थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक युवक ने अपने ही दोस्त पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन आरोपी पुलिस की कथित “कृपा दृष्टि” के चलते खुलेआम घूम रहा है।
​क्या है पूरा मामला?
​मिली जानकारी के अनुसार, विवाद किसी पुरानी बात को लेकर शुरू हुआ जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा। आरोपी ने तैश में आकर अपने ही मित्र पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में घायल युवक के चेहरे और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं (जैसा कि विजुअल्स में स्पष्ट दिख रहा है)।
​पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप
​इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस का रवैया है। पीड़ित और उसके परिजनों का आरोप है कि घटना की शिकायत के बावजूद कोनी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में यह बात जोर पकड़ रही है कि पुलिस की ढिलाई की वजह से आरोपी बेखौफ बाहर घूम रहा है, जिससे पीड़ित परिवार डरा हुआ है।
​प्रेस विज्ञप्ति (प्रारूप)
​कार्यालय: पीड़ित पक्ष / स्थानीय नागरिक समूह
दिनांक: 02 मई 2026
स्थान: बिलासपुर (छ.ग.)
​विषय: कोनी थाना अंतर्गत हुए जानलेवा हमले के आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी हेतु मांग।
​आज बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था की लचर स्थिति उजागर हुई है। एक युवक पर उसके ही मित्र द्वारा किए गए जानलेवा चाकूबाजी के हमले ने क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
​प्रमुख बिंदु:
​घटना: कोनी थाना क्षेत्र में आपसी विवाद में चाकूबाजी।
​पीड़ित की स्थिति: घायल युवक का उपचार जारी है, चेहरे पर गंभीर चोट के निशान पुलिस की सुस्ती की कहानी कह रहे हैं।
​मांग: हम प्रशासन से मांग करते हैं कि राजनीतिक या अन्य किसी भी दबाव को दरकिनार कर आरोपी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
​यदि 24 घंटे के भीतर पुलिस आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं भेजती है, तो पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिक उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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