छत्तीसगढ़ बेमेतरा में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का चातुर्मास्य व्रत एवं धर्म आशीर्वचन ।

बेमेतरा में जगद्गुरु शंकराचार्य जी का चातुर्मास्य व्रत एवं धर्म आशीर्वचन
ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदसरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य एवं गरिमामयी उपस्थिति में बेमेतरा (छत्तीसगढ़) में ‘चातुर्मास्य व्रत एवं धर्म आशीर्वचन’ कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा व भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।
आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों व ग्रामीण अंचलों से आए श्रद्धालुओं ने पूज्य महाराज श्री का पूजन-अर्चन कर आशीर्वचन प्राप्त किया। विभिन्न ग्रामीण समितियों एवं श्रद्धालुओं द्वारा धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठानों के सुचारू संचालन हेतु खाद्य सामग्री व अन्य सामग्रियों का सहयोग समर्पित किया गया।
कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु:
धर्म एवं संस्कृति का संरक्षण: पूज्यपाद शंकराचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में सनातन परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं तथा मठ-मंदिरों की सुरक्षा व संवर्धन पर विशेष बल दिया।
गौ-संरक्षण एवं संवर्धन: कार्यक्रम के दौरान गौ-सेवा तथा गौ-वंश के संरक्षण का संकल्प दोहराया गया, जिससे समाज में गौ-संवर्धन एवं पर्यावरण चेतना का प्रसार हो सके।

सामाजिक समरसता व लोक-कल्याण: आशीर्वचन के माध्यम से समाज में धर्म, नीति, सद्भावना तथा अखंड भारत की अवधारणा को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।
