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बिल्हा का ‘देवकिरारी’ बना नरक: 25 साल का अहंकार या भ्रष्टाचार? सड़कों की जगह बने ‘सरकारी स्विमिंग पूल’, बच्चों ने छोड़ा स्कूल।

बिल्हा का ‘देवकिरारी’ बना नरक: 25 साल का अहंकार या भ्रष्टाचार? सड़कों की जगह बने ‘सरकारी स्विमिंग पूल’, बच्चों ने छोड़ा स्कूल
​15वें वित्त आयोग की करोड़ों की राशि में बड़े गबन का आरोप; तंग आकर ग्रामीणों ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम, बिलासपुर कलेक्ट्रेट के घेराव की चेतावनी।
​मुख्य बिंदु:
​कीचड़ और बदहाली: वार्डों और बिटकुली मुख्य मार्ग पर घुटना भर पानी; राहगीर और मरीज बेबस।
​शिक्षा पर प्रहार: रोज़ कपड़े खराब होने और गिरने के डर से दर्जनों बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा।
​सत्ता का दुरूपयोग: सरपंच पति पर सत्ता और विधायक के नाम पर दबंगई करने का आरोप।
​निष्पक्ष जांच की मांग: पिछले 25 वर्षों के विकास कार्यों और 15वें वित्त आयोग की राशि के ऑडिट की मांग।


​बिलासपुर:
ग्राम पंचायत देवकिरारी (ब्लॉक बिल्हा, जिला बिलासपुर) आज बदहाली, उपेक्षा और चरम पर पहुँचे भ्रष्टाचार की खौफनाक मिसाल बन चुका है। पिछले 25 वर्षों से एक ही गुट का कब्ज़ा झेल रहे इस गाँव की स्थिति अब नारकीय हो चुकी है। जमीनी दावों की पोल खोलती इस ग्राउंड रिपोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों की बखिया उधेड़ कर रख दी है।
​सड़कें गायब, बने ‘फाइव स्टार स्विमिंग पूल’
​पंचायत के वार्ड क्रमांक 1, 4, 5 और 8 की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यहाँ सड़कों का नामो-निशान मिट चुका है। घुटने भर कीचड़ और जमा पानी से परेशान होकर ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा— “सरपंच ने हमारे लिए सड़कों पर ही फाइव स्टार स्विमिंग पूल बनवा दिया है।”
​इस बदहाली का सबसे दर्दनाक असर नन्हे-मुन्ने बच्चों पर पड़ रहा है। रोज़ कीचड़ में गिरकर कपड़े खराब होने के कारण दर्जनों बच्चों ने पढ़ाई छोड़कर स्कूल जाना बंद कर दिया है। बुजुर्ग और मरीज अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं।
​दोहरी नीति और ध्वस्त बिटकुली मार्ग
​देवकिरारी को बिटकुली से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुका है। इससे किसानों की ट्रैक्टर-ट्रॉली और आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाओं का आवागमन पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब देवकिरारी से बिल्हा जाने वाला मार्ग बेहतर बन सकता है, तो बाकी वार्डों और बिटकुली रोड के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
​25 साल का कब्ज़ा, सरपंच पति की ‘दबंगई’
​रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि पिछले 5 पंचवर्षीय (25 साल) से सरपंच पद पर एक ही आश्रित ग्राम ‘किरारी भाटापारा’ का कब्ज़ा है। वर्तमान सरपंच श्रीमती अनसूईया पाटले के नाम पर पूरी पंचायत का काम उनके पति अशोक पाटले और उनका परिवार चला रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कोई बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाता है, तो बिल्हा विधायक के नाम पर रोब दिखाया जाता है और धमकियां दी जाती हैं।

​15वें वित्त के करोड़ों रुपये कहाँ गायब?
​केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत गांव के विकास के लिए भेजी गई लाखों-करोड़ों रुपये की राशि कहाँ गायब हो गई, यह बड़ा सवाल है। धरातल पर जलभराव और गड्ढों के अलावा कुछ नज़र नहीं आ रहा, जो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और गबन की तरफ साफ इशारा करता है।
​जनता की माँगें और अल्टीमेटम:
​आक्रोशित ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर एवं शासन से निम्नलिखित माँगें की हैं:
​निष्पक्ष ऑडिट: पिछले 25 वर्षों के विकास कार्यों और 15वें वित्त आयोग की राशि की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए।
​तत्काल सड़क निर्माण: प्रभावित वार्डों और बिटकुली मार्ग का निर्माण कार्य बिना विलंब शुरू कराया जाए।
​कलेक्ट्रेट घेराव की चेतावनी:
ग्रामीणों ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। यदि तय समयसीमा में सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण बिलासपुर कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे, जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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