सरगांव में पंचगव्य संन्यास संस्कार के तहत प्रवीण भारती ने धारण किया संन्यास
सरगांव में पंचगव्य संन्यास संस्कार के तहत प्रवीण भारती ने धारण किया संन्यास

सरगांव (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ के सरगांव क्षेत्र अंतर्गत मनिहारी नदी के पावन तट पर स्थित श्री सच्चिदानंद तीर्थ महा स्वामिगल, श्री चक्र महामेरू पीठम (बिलासपुर-मुंगेली) के तत्वाधान में एक भव्य पंचगव्य संन्यास संस्कार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट के राष्ट्रीय सह प्रभारी एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी प्रवीण भारती ने गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार संन्यास धारण किया।
संन्यास संस्कार विधिवत वैदिक परंपराओं के अनुरूप सम्पन्न हुआ, जिसमें विभिन्न गुरुओं द्वारा दीक्षा प्रदान की गई। इस दौरान—
चोटी गुरु — श्री रेवती भारती
भगवा गुरु — श्री चाणक्य चेतन पुरी (सर्किट पुरी बाबा)
लंगोटी गुरु — नवरात्रि गिरी
भस्मी गुरु — वीरेंद्र गिरी
कंठी गुरु — पारस भारती
ने प्रवीण भारती को संन्यास दीक्षा प्रदान की।
संन्यास ग्रहण के पश्चात वे “बाल योगी संन्यासी प्रवीण भारती” के रूप में जनकल्याण एवं आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर अग्रसर हुए। उन्होंने पंचगव्य संन्यास संस्कार के माध्यम से सांसारिक जीवन का त्याग कर समाज सेवा और आत्मकल्याण का संकल्प लिया।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं अमर स्तंभ आरजे रमझाझर छत्तीसगढ़ पं. श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री ने संत समाज के साथ प्रवीण भारती को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में श्री पंचमुखी हनुमान जी बेलमुंडी धाम के मुख्य महंत श्री चाणक्य चैतन्य परिवार सर्किट पुरी बाबा ने संन्यास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन परंपरा में संन्यास जीवन का सर्वोच्च आश्रम है, जिसमें साधक सांसारिक मोह-माया का त्याग कर ईश्वर साधना और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर चलता है। संन्यास आत्म-साक्षात्कार और परमार्थ का मार्ग है, न कि जीवन से पलायन।
उन्होंने बताया कि संन्यास के अंतर्गत त्याग, संयमित जीवनशैली, ब्रह्मचर्य पालन, भिक्षावृत्ति तथा निरंतर प्रभु स्मरण प्रमुख नियम हैं, जिनका पालन कर साधक आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

इस पावन अवसर पर विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कृति प्रकोष्ठ पं. श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री, छत्तीसगढ़ प्रभारी, महिला विंग की अध्यक्ष ज्योति कुलदीप सहित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने उपस्थित रहकर बाल योगी संन्यासी प्रवीण भारती को बधाई दी और उनके जनसेवा के संकल्प की सराहना की।


कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे वातावरण में भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष प्रभाव देखने को मिला।

